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प्रेरणा -अभिप्रेरक सन्देश,सकारात्मक सोच, छात्र प्रेरणा, सफलता,लक्ष्य, ख़ुशी, कामयाबी, प्रतियोगी परीक्

बच्चों के साथ दोस्तों की तरह न रहे : साइना नेहवाल की पेरेंट्स को नसीहत।

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‘बच्चों से दोस्तों की तरह न रहें..’, भारतीय पैरेंट्स को साइना नेहवाल ने दी नसीहत बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने हाल ही में पेरेंटिंग पर एक बयान दिया, जिसके खूब चर्चा हो रही है. उनका कहना है कि बच्चों की सफलता के लिए अनुशासन और सख्ती जरूरी है. जानिए सायना के विचार और एक्सपर्ट साइकेट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर की राय कि परवरिश में 'दोस्ती' और 'कंट्रोल' के बीच सही बैलेंस कैसे बनाए समय के साथ परवरिश बदलनी चाहिये बच्चों की परवरिश हमेशा से माता-पिता के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी रही है. हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा न सिर्फ पढ़ाई और करियर में आगे बढ़े, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बने. इसी वजह से परवरिश को लेकर अलग-अलग सोच देखने को मिलती है. कुछ माता-पिता बच्चों के साथ दोस्तों की तरह रहना पसंद करते हैं, ताकि वे खुलकर अपनी बात कह सकें.  वहीं कुछ लोग मानते हैं कि बच्चों को सही रास्ते पर रखने के लिए थोड़ी सख्ती जरूरी होती है. आज के समय में यह बहस और भी ज्यादा तेज हो गई है. मोबाइल, सोशल मीडिया और बदलते लाइफस्टाइल के बीच बच्चों को अनुशासन सिखाना आसान नहीं रहा. कई पैरेंट्स सो...

"प्रेरक प्रसंग" - गलती स्वीकार करना सच्ची महानता है, अल्बर्ट आइंस्टीन से जुड़े प्रेरक प्रसंग।

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प्रेरणा डायरी ब्लॉग  हिंडौन सिटी, राजस्थान, इंडिया। "प्रेरक प्रसंग"   - गलती स्वीकार करना ही सच्ची महानता है। अल्बर्ट आइंस्टीन   अल्बर्ट आइंस्टीन विश्व के महानतम वैज्ञानिकों में से एक थे, जिन्होंने मानव ज्ञान की दिशा ही बदल दी। उनका जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी में हुआ। उन्होंने सापेक्षता का सिद्धांत   देकर समय, स्थान और ऊर्जा की हमारी समझ को नई ऊँचाई दी। उनका प्रसिद्ध समीकरण E = mc² विज्ञान की सबसे क्रांतिकारी खोजों में गिना जाता है। 1921 में उन्हें भौतिकी का नोबेल   पुरस्कार मिला। आइंस्टीन केवल वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि मानवता, शांति और कल्पनाशक्ति के भी महान प्रतीक थे। उनका जीवन यह सिखाता है कि जिज्ञासा और सोच से दुनिया बदली जा सकती है।  आज के आर्टिकल में मैं चर्चा करना चाहूंगा 'अल्बर्ट आइंस्टीन' से जुड़े एक "प्रेरक प्रसंग"  की ।     अल्बर्ट आइंस्टीन के जीवन का यह प्रसंग उनकी ईमानदारी और विनम्रता को उजागर करता है।  यह प्रेरक प्रसंग हमें यह सीख देता है कि सच्चा ज्ञान कब से नहीं बल्कि सत्य के प्रति निष्ठा से पहचाना जा...